शुक्रवार, 22 मार्च 2024

बेटे को साहेब बनाने के लिए Bete Ko Saheb Banane Ke Liye (Aadiwasi Kavita आदिवासी कविता)

                                        

बेटे को साहेब बनाने के लिए

– डॉ. दिलीप गिऱ्हे

माँ…
दिन-रात जलती रही है,
दीये की तरह—
बेटे को साहेब बनाने के लिए।

माँ…
सुबह नहीं,
अँधेरे से पहले ही उठती है,
जब दुनिया सो रही होती है,
तब वह अपने सपनों को
चूल्हे की आग में झोंक देती है।

रोटियाँ सेंकते-सेंकते
वह अपने हाथ जला लेती है,
पर बेटे की थाली में
कभी कमी नहीं आने देती।

फिर निकल पड़ती है—
खेतों की पगडंडियों पर,
या गिट्टी की खदानों में,
जहाँ हर चोट
उसके शरीर पर नहीं,
उसके सपनों पर पड़ती है।

वह पसीने से कमाती है,
आँसुओं से बचाती है,
और हर एक पैसा
अपने बेटे के भविष्य में
चुपचाप जोड़ती जाती है।

माँ…
अपने लिए कभी कुछ नहीं खरीदती,
फटे कपड़ों को
बार-बार सीकर पहनती है,
लेकिन बेटे के कपड़ों में
कभी गरीबी नहीं दिखने देती।

माँ…
जब बेटा घर लौटता है,
तो सबसे पहले पूछती है—
“बेटा, खाना खाया क्या?”
और खुद…
सबको खिलाने के बाद
चुपचाप बचा हुआ खा लेती है।

जैसे उसकी भूख भी
बेटे के सपनों की मोहताज हो गई हो।

माँ…
हर रोज़, हर बार पूछती है—
“बेटा, तू कब साहेब बनेगा?”
उसकी आवाज़ में
उम्मीद भी होती है,
और एक अधूरा जीवन भी।

वह धीरे से कहती है—
“मैं तो एक अक्षर भी नहीं पढ़ी…
इसीलिए तुझे पढ़ा रही हूँ…”

उसकी आँखों में
सिर्फ सपना नहीं,
एक अधूरी दुनिया बसती है—
जिसे वह अपने बेटे में
पूरा होते देखना चाहती है।

माँ…
जब बस्ती के लाउडस्पीकर से
महापुरुषों के संघर्ष की गूंज सुनती है—
डॉ. भीमराव अम्बेडकर की आवाज़,
सावित्रीबाई फुले की शिक्षा,
रमाबाई अम्बेडकर का त्याग,
और राजमाता जिजामाई का संकल्प—

तब वह अपने आँसू पोंछकर
एक नया सपना बुनती है।

वह सोचती है—
“मेरा बेटा भी…
एक दिन साहेब बनेगा,
लोग उसे पहचानेंगे,
और मेरा संघर्ष
उसकी पहचान बन जाएगा…”

इसी उम्मीद पर
वह हर दिन जीती है,
हर दर्द सहती है,
हर आँसू छुपाती है।

माँ आज भी जल रही है—
खामोशी से,
संघर्ष में,
त्याग में…

सिर्फ एक सपना लेकर—

बेटे को साहेब बनाने के लिए।

4 टिप्‍पणियां:

Sukanya D. Girhe ने कहा…

Very nice sir ji

Nikeah pralhadrao kurkute ने कहा…

वास्त विकता पर आधरित

Pallavi Satpute ने कहा…

Ma ke sangharsh ka varnan Bahut hi gaharai se kiya☺️❤️

मेरे अनुवाद ने कहा…

बहुत ही सुंदर कविता है।