फ़र्क समझो…
– डॉ. दिलीप गिऱ्हे
फ़र्क समझो—
विज्ञान और अंधविश्वास के बीच का,
क्योंकि यही फ़र्क तय करता है
जीवन और भ्रम के रास्ते।हमें समझना होगा
कि विज्ञान क्या है—
सत्य की खोज,
तर्क की रोशनी,
और अनुभव की कसौटी पर खरा उतरता ज्ञान।और अंधविश्वास क्या है—
डर से जन्मा विश्वास,
जो बिना सवाल किए
पीढ़ी-दर-पीढ़ी
मन में बिठा दिया जाता है।विज्ञान संकटों से लड़ता है,
बीमारियों का इलाज करता है,
अंधकार में भी
रास्ता दिखाता है।जबकि अंधविश्वास—
संकट को समझने के बजाय
उसे और गहरा करता है,
डर को बढ़ाता है,
और इंसान को
भ्रम के जाल में उलझा देता है।विज्ञान में सच्चाई होती है,
प्रमाण होते हैं,
हर बात को परखने की
खुली स्वतंत्रता होती है।अंधविश्वास में—
प्रश्नों की जगह नहीं होती,
सिर्फ मान लेना होता है,
बिना सोचे, बिना समझे।इसीलिए लोग
अक्सर अंधविश्वास को अपनाते हैं—
क्योंकि वह आसान है,
वह सोचने से बचाता है,
वह डर को सहारा देता है।और विज्ञान?
वह प्रश्न पूछता है,
वह सोचने पर मजबूर करता है,
वह सच के सामने खड़ा करता है।लेकिन जब जीवन और मृत्यु के बीच
एक पल का फ़ासला रह जाता है,
जब हर रास्ता बंद हो जाता है—
तब वही व्यक्ति
विज्ञान की ओर देखता है,
उसी से उम्मीद करता है।यही सबसे बड़ा सत्य है—
कि अंततः भरोसा
सत्य पर ही टिकता है,
न कि भ्रम पर।इसलिए ज़रूरी है—
हम फ़र्क समझें,
अपनी सोच को जागृत करें,
और अंधकार से बाहर निकलकर
तर्क और ज्ञान की रोशनी अपनाएँ।क्योंकि—
फ़र्क समझना ही
सही दिशा में पहला कदम है।

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