मन की नाव पतवार से भाव-सागर में हिचकोले मार पहुँचाती है दूरियाँ:निर्मला पुतुल
-Dr.Dilip Girhe
प्रस्तावना :
आधुनिक हिंदी कविता में मानवीय संबंधों, संवेदनाओं और जीवन के सूक्ष्म अनुभवों को अभिव्यक्त करने की समृद्ध परंपरा रही है। विशेष रूप से समकालीन कवयित्रियों ने अपने अनुभवों और सामाजिक यथार्थ के आधार पर ऐसी कविताएँ रची हैं, जो मनुष्य के आंतरिक संसार को गहराई से स्पर्श करती हैं। आदिवासी समाज की संवेदनाओं और जीवनानुभवों को सशक्त स्वर देने वाली प्रमुख कवयित्री निर्मला पुतुल की कविताएँ इसी परंपरा का महत्त्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनकी रचनाओं में प्रकृति, मानवीय संबंध, संघर्ष और संवेदनशीलता का अत्यंत मार्मिक चित्रण मिलता है। निर्मला पुतुल की कविता 'दूरियाँ' मानवीय रिश्तों की गहनता और प्रेम की शक्ति को अत्यंत सहज भाषा में व्यक्त करती है। यह कविता दर्शाती है कि जीवन में आने वाली दूरियाँ केवल अलगाव या बिछोह का प्रतीक नहीं होतीं, बल्कि कई बार वही दूरियाँ मनुष्य को अपने संबंधों के वास्तविक महत्व का एहसास कराती हैं। जब व्यक्ति अपने प्रियजनों से दूर होता है, तब वह उनके साथ बिताए गए क्षणों, स्नेह और अपनत्व को और अधिक गहराई से महसूस करता है। कविता में कवयित्री ने प्रतीकों और बिंबों के माध्यम से यह बताया है कि दूरियाँ कई बार मनुष्य के भीतर छिपी संवेदनाओं को जागृत करती हैं। मन में संचित शिकायतें, अहंकार और कटुता समय के साथ समाप्त होने लगती हैं और उनके स्थान पर प्रेम, समझ तथा अपनत्व की भावना विकसित होती है। यही कारण है कि कवयित्री दूरियों को एक ऐसी शक्ति के रूप में देखती हैं, जो मनुष्य के मन रूपी मरुस्थल में भी प्रेम का बीज बोने की क्षमता रखती है। वर्तमान समय में जब वैश्वीकरण, व्यस्त जीवनशैली और भौतिक परिस्थितियों के कारण लोग अपने परिवारों और प्रियजनों से दूर रहने के लिए विवश हैं, तब यह कविता और भी अधिक प्रासंगिक प्रतीत होती है। 'दूरियाँ' कविता मानवीय संबंधों की गहराई, संवेदनशीलता और प्रेम की महत्ता को उजागर करने वाली एक अत्यंत सार्थक रचना है।
दूरियाँ
मिटा देती हैं
तमाम शिकवे गिले
और बो देती हैं
मन मरूस्थल में
प्रेम का बीज
टूटे दिलों के बीच
नई डोर बन कर
मन की नाव पतवार से
भाव-सागर में हिचकोले मार
पहुँचाती है
अपनों के करीब... करीब अपनों के।
-निर्मला पुतुल
निर्मला पुतुल की कविता 'दूरियाँ' मानवीय संबंधों की संवेदनशीलता और प्रेम की शक्ति को अत्यंत सरल किंतु प्रभावी ढंग से व्यक्त करती है। कवयित्री यह बताना चाहती हैं कि जीवन में आने वाली दूरियाँ केवल अलगाव का कारण नहीं बनतीं, बल्कि कई बार वही दूरियाँ मनुष्य को अपने रिश्तों के महत्व का एहसास भी कराती हैं। जब मनुष्य अपने प्रियजनों से दूर होता है, तब उसे उनके प्रेम, अपनत्व और साथ की वास्तविक कीमत समझ में आती है। कविता की आरंभिक पंक्तियों में कवयित्री कहती हैं कि दूरियाँ तमाम शिकवे-गिले मिटा देती हैं। इसका आशय यह है कि जब लोग एक-दूसरे से दूर हो जाते हैं, तब उनके बीच के छोटे-मोटे विवाद और मनमुटाव स्वतः ही कम हो जाते हैं। समय और दूरी मन को शांत कर देते हैं और मनुष्य अपने संबंधों को अधिक सकारात्मक दृष्टि से देखने लगता है। यह दूरियाँ मन के मरुस्थल में भी प्रेम का बीज बो देती हैं। यहाँ मरुस्थल का अर्थ है वह मन जो कभी कटुता, अहंकार या उदासी से भर गया था। जब उसमें प्रेम का बीज बोया जाता है, तो वह सूखा मन भी फिर से स्नेह और संवेदना से हरा-भरा हो सकता है।कविता के अगले भाग में कवयित्री बताती हैं कि दूरियाँ टूटे दिलों के बीच नई डोर का काम करती हैं। इसका अर्थ है कि जब रिश्तों में दरार आ जाती है, तब समय और दूरी उन टूटे हुए दिलों को जोड़ने का अवसर प्रदान करती है। यह डोर प्रेम, समझ और सहानुभूति की होती है, जो लोगों को फिर से एक-दूसरे के करीब लाती है। कविता में प्रयुक्त 'मन की नाव' और 'पतवार' का प्रतीक अत्यंत अर्थपूर्ण है। यहाँ मन की नाव हमारे भावनात्मक जीवन का प्रतीक है और पतवार उस शक्ति का, जो हमें संबंधों के सागर में आगे बढ़ने की दिशा देती है। जब यह नाव भाव-सागर में हिचकोले खाती है, तो इसका अर्थ है कि जीवन में भावनाओं के उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। फिर भी प्रेम और अपनत्व की पतवार हमें अपने प्रियजनों के और अधिक करीब ले आती है। यदि इस कविता को वर्तमान समय की घटनाओं से जोड़कर देखें, तो इसका महत्व और भी स्पष्ट हो जाता है। आज के दौर में वैश्वीकरण, रोजगार, शिक्षा और आधुनिक जीवन-शैली के कारण लोग अपने परिवारों से दूर रह रहे हैं। लाखों लोग अपने गाँव या घर छोड़कर दूसरे शहरों या देशों में काम करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में भौतिक दूरी तो बढ़ जाती है, परंतु मन का संबंध बना रहता है। विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के समय यह अनुभव पूरी दुनिया ने किया। लॉकडाउन के कारण लोग अपने प्रियजनों से दूर हो गए थे। उस समय लोगों को अपने परिवार और संबंधों का महत्व अधिक गहराई से समझ में आया। मोबाइल, इंटरनेट और संदेशों के माध्यम से लोग एक-दूसरे के करीब बने रहने का प्रयास करते रहे। इस प्रकार दूरी ने ही लोगों के बीच प्रेम और अपनत्व को और अधिक मजबूत किया। इस प्रकार निर्मला पुतुल की यह कविता हमें यह संदेश देती है कि जीवन में आने वाली दूरियाँ हमेशा नकारात्मक नहीं होतीं। कई बार वही दूरियाँ हमारे संबंधों को और गहरा बनाती हैं, हमारे मन के मरुस्थल में प्रेम के बीज बोती हैं और हमें अपने प्रियजनों के और अधिक करीब ले आती हैं। यही इस कविता का मूल भाव है।
निष्कर्ष:
उपरोक्त विवेचन से स्पष्ट होता है कि निर्मला पुतुल की कविता 'दूरियाँ' मानवीय संबंधों की गहराई और संवेदनशीलता को उजागर करने वाली एक मार्मिक रचना है। कवयित्री ने इस कविता के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जीवन में आने वाली दूरियाँ हमेशा नकारात्मक नहीं होतीं, बल्कि कई बार वही दूरियाँ मनुष्य को अपने संबंधों की वास्तविक महत्ता का बोध कराती हैं। जब व्यक्ति अपने प्रियजनों से दूर होता है, तब उसे उनके प्रेम, सहयोग और साथ की कमी गहराई से महसूस होती है, जिससे उसके मन में संबंधों के प्रति सम्मान और अपनत्व की भावना और अधिक प्रबल हो जाती है। कविता में प्रयुक्त प्रतीक—जैसे मन की नाव, पतवार और भाव-सागर—मानवीय जीवन की भावनात्मक यात्रा को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करते हैं। ये प्रतीक यह दर्शाते हैं कि जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, किंतु प्रेम, विश्वास और समझदारी की शक्ति हमें अपने प्रियजनों के और अधिक निकट ले आती है। दूरियाँ टूटे हुए दिलों के बीच एक नई डोर बनाकर संबंधों को पुनः जोड़ने का कार्य करती हैं। समकालीन संदर्भ में यह कविता और भी अधिक सार्थक प्रतीत होती है, क्योंकि आज के युग में लोग शिक्षा, रोजगार और अन्य कारणों से अपने घर-परिवार से दूर रह रहे हैं। इसके बावजूद उनके मन में अपने संबंधों के प्रति प्रेम और अपनत्व बना रहता है। आधुनिक संचार माध्यमों और स्मृतियों के सहारे लोग अपने प्रियजनों से जुड़े रहते हैं। अतः कहा जा सकता है कि निर्मला पुतुल की यह कविता हमें यह प्रेरणा देती है कि हमें अपने संबंधों को सहेजकर रखना चाहिए और छोटी-छोटी बातों को लेकर उनमें दूरी नहीं आने देनी चाहिए। यदि कभी परिस्थितियों के कारण दूरियाँ उत्पन्न भी हो जाएँ, तो उन्हें प्रेम, समझ और संवेदना के माध्यम से मिटाने का प्रयास करना चाहिए। यही इस कविता का मूल संदेश और सार है।
ब्लॉग से जुड़ने के लिए निम्न व्हाट्सएप ग्रुप चैनल को जॉइन करे...


कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें