मंगलवार, 19 मार्च 2024

हिंदी संवादों का सेतु (कविता) Hindi Samvadon ka Setu Hai


हिंदी : संवादों का सेतु

– डॉ. दिलीप गिऱ्हे 

भारत एक बहुभाषी देश है,
जहाँ हर प्रदेश, हर समाज
अपनी भाषा और संस्कृति के रंगों से सजा है।

इन विविधताओं के बीच
हिंदी एक सेतु बनकर उभरी है,
जो भाषाओं को जोड़ती है,
दिलों को मिलाती है,
और विचारों को एक-दूसरे तक पहुँचाती है।

हिंदी ने हर भाषा का सम्मान करते हुए
उनका हाथ थामा है,
उनके साहित्य को अपनाया है,
और उन्हें नए पाठकों तक पहुँचाया है।

इसने एक भाषा के साहित्य को
दूसरी भाषा के हृदय तक पहुँचाया,
शब्दों के बीच पुल बनाया,
और भावों के प्रवाह को निरंतर रखा।

कई भाषाओं के रचनाकारों को
एक मंच पर लाकर,
संवाद की नई परंपरा शुरू की है—
जहाँ विचार टकराते नहीं,
बल्कि मिलकर नए अर्थ गढ़ते हैं।

हिंदी ने विमर्श को दिशा दी है,
विचारों को विस्तार दिया है,
और साहित्य को सीमाओं से मुक्त किया है।

आज हिंदी केवल एक भाषा नहीं,
बल्कि एक समृद्धि का महामार्ग बन चुकी है,
जो विविध भाषाओं को साथ लेकर
साहित्य को निरंतर उन्नति की ओर ले जा रही है।

यह सेतु अब केवल भारत तक सीमित नहीं,
बल्कि विश्व के अनेक देशों तक फैल चुका है,
जहाँ हिंदी संवाद, संस्कृति और साहित्य का
एक सशक्त माध्यम बन रही है।

इस प्रकार हिंदी
सिर्फ शब्दों का माध्यम नहीं,
बल्कि भावों, विचारों और संस्कृतियों को
एक सूत्र में पिरोने वाला
अटूट सेतु बन गई है।


कोई टिप्पणी नहीं: