मंगलवार, 2 अप्रैल 2024

हम निकले हैं अस्तित्व की खोज के लिए..AADIWASI KAVITA

 

हम निकले हैं अस्तित्व की खोज के लिए…

– डॉ. दिलीप गिऱ्हे 

हम निकले हैं अस्तित्व की खोज के लिए…

जारवा आदिवासी,
अंडमान-निकोबार के द्वीपों पर बसे
एक अलग संसार के वासी हैं—
जहाँ प्रकृति ही उनका घर है,
और जंगल उनकी पहचान।

उनका अपना जीवन है,
अपनी भाषा है,
अपनी परंपराएँ हैं,
अपना रहन-सहन है,
और सबसे बढ़कर—
अपना एक स्वतंत्र अस्तित्व है।

वे हमारे जैसे नहीं,
पर वे अधूरे भी नहीं—
वे अपनी दुनिया में
पूर्ण और संतुलित हैं।

लेकिन हम…
हम निकल पड़ते हैं
उनके "अस्तित्व" की खोज में,
अंडमान की यात्राओं पर,
जिज्ञासा और उत्सुकता के नाम पर।

हम उन्हें देखने जाते हैं,
मानो वे कोई दृश्य हों,
कोई प्रदर्शन हों,
या किसी संग्रहालय की वस्तु।

ना हमें उनकी भाषा आती है,
ना हम उनके भाव समझ पाते हैं,
ना उनके जीवन की गहराई को
छू भी पाते हैं।

फिर भी हम…
अपने कैमरों में उन्हें कैद करते हैं,
एक फोटो लेते हैं,
और उसे "स्टेटस" बना देते हैं।

हम कहते हैं—
"हम गए थे…
उनकी दुनिया देख कर आए हैं…"

पर क्या सच में
हमने उन्हें देखा है?

या केवल
उनके अस्तित्व को
अपने अहंकार की आँखों से नापा है?

अस्तित्व की खोज
दूसरों को देखने में नहीं,
बल्कि उन्हें समझने में है—
उनकी अस्मिता का सम्मान करने में है।

शायद सच्ची यात्रा
वह नहीं
जो हमें उनके पास ले जाए,
बल्कि वह है
जो हमें अपने भीतर ले जाए—

जहाँ हम सीख सकें
सम्मान, संवेदना और सह-अस्तित्व का अर्थ।

तभी हम कह पाएँगे—
हम सच में निकले थे
अस्तित्व की खोज के लिए…


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