मेरी कविता की परिभाषा
– डॉ. दिलीप गिऱ्हे
कविता केवल शब्दों का संयोजन नहीं,
यह कवि के विचारों का जीवंत संग्रह है,
जो समय और अनुभव के साथ
एक गाथा बनकर उभरता है।कविता दबे हुए भावों का महासागर है,
जिसकी गहराइयों में
अनकहे दर्द, अनसुनी खुशियाँ
और अधूरी कहानियाँ लहराती रहती हैं।कविता कवि की पहचान है,
उसके अस्तित्व का दर्पण है,
जिसमें उसका मन, उसका जीवन
और उसकी संवेदनाएँ स्पष्ट दिखाई देती हैं।कविता कवि के दिल की धड़कन है,
जो कागज़ के कोरे पन्नों पर
शब्द बनकर स्पंदित होती है,
और हर पंक्ति में जीवन का संगीत भर देती है।हर कवि के विचार
अपने आप में एक कविता होते हैं,
बस उन्हें महसूस करने की
एक सच्ची दृष्टि होनी चाहिए।कविता ज़ुबान और कलम के शब्द भर नहीं,
यह आत्मा की अभिव्यक्ति है,
जो भीतर से उठकर
सहज ही बाहर आ जाती है।कविता किसी लेख की तरह
बनावटी नहीं होती,
न ही उसे नियमों में बाँधा जा सकता है—
वह तो मन के गहराई से
स्वतः ही जन्म लेती है।कविता वह अनुभूति है
जो लिखने से पहले महसूस होती है,
जो पढ़ने के बाद भी
मन में गूंजती रहती है।यह एक यात्रा है—
मन से शब्द तक,
और शब्द से हृदय तक,
जहाँ हर पाठक
अपने अर्थ खोज लेता है।कविता अंत नहीं,
एक सतत प्रवाह है—
जो हर नए अनुभव के साथ
नया रूप धारण करता है।

2 टिप्पणियां:
Very nice sir j
बहोत बढिया सर जी
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