मंगलवार, 19 मार्च 2024

फूल (काव्य लेखन) Fhul Kavita ( Is kavita mein phul ke vibhinn rupon ko manav ke vyavahar ke jodakar likha hai)

              

 

फूल

– दिलीप गिऱ्हे 

फूल इसलिए सुंदर लगते हैं,
क्योंकि वे सुगंध बिखेरते हैं,
अपनी कोमल पंखुड़ियों में
मधुरता के रंग समेटे रहते हैं।

गुलाब इसलिए प्रिय लगता है,
क्योंकि वह प्रेम का प्रतीक है,
उसकी हर एक पंखुड़ी में
ममता और स्नेह का संगीत है।

कमल भी कम सुंदर नहीं,
चाहे वह कीचड़ में ही क्यों न खिलता हो,
वह सिखाता है हमें यही—
कि पवित्रता हर परिस्थिति में पलती हो।

फूल चाहे जैसा भी हो,
हर रंग अपना संदेश सुनाता है,
कोई शांति का, कोई उमंग का,
कोई जीवन का राग गुनगुनाता है।

इनमें भेदभाव नहीं होता,
न कोई छल, न कोई कपट,
हर फूल अपने स्वभाव से
करता है जग को आकर्षित और संपन्न।

ये इंसानों की तरह नहीं होते,
जो रूप और स्वार्थ में उलझ जाते हैं,
फूल तो बस देना जानते हैं,
बिना कुछ चाहे ही मुस्कुराते हैं।

सच ही कहा है कवि ने—
फूल नहीं, उनके रंग बोलते हैं,
हर पंखुड़ी की खामोशी में
जीवन के गहरे अर्थ डोलते हैं।

इसलिए जब भी तुम फूलों को देखो,
उनकी सरलता को अपनाना,
सुगंध बनकर जीवन में
प्रेम और सौंदर्य फैलाना।


1 टिप्पणी:

Pallavi Satpute ने कहा…

क्या खुब कहा हैं... फुलो के बारे मैं.... वाह वाह....