हमारी पहचान
-डॉ. दिलीप गिऱ्हे
हमारी पहचान—
न ‘वनवासी’ की सीमाओं में कैद है,
न ‘गिरिजन’ की परिभाषाओं में बंधी है,
न ‘हरिजन’ के दिए हुए नामों में सिमटी है।हमारी पहचान—
हम स्वयं गढ़ते हैं,
हम स्वयं लिखते हैं—
हम आदिवासी हैं,
इस धरती के मूलनिवासी हैं,
यही हमारा स्वाभिमान है,
यही हमारी असली पहचान है।हमारी पहचान—
न पत्थरों के मंदिरों में बसती है,
न ऊँचे-ऊँचे भवनों में सिमटती है,
न मस्जिदों के गुम्बदों में ठहरती है।हमारी पहचान—
प्रकृति की गोद में पलती है,
पेड़ों की सरसराहट में गूंजती है,
नदियों की धारा में बहती है।हमारी पहचान—
जल, जंगल और ज़मीन से है,
उन्हीं से हमारा जीवन है,
उन्हीं से हमारी सांसें हैं,
उन्हीं में हमारा भविष्य है।हमारी पहचान—
न किसी ‘राम राज्य’ के सपनों में खोई है,
न किसी ‘कृष्ण राज्य’ की कल्पनाओं में बंधी है।हमारी पहचान—
उस सभ्यता की विरासत है,
जिसे अक्सर ‘रावण राज्य’ कहकर
नज़रअंदाज़ किया गया,
पर जिसने प्रकृति, ज्ञान और
समानता का रास्ता दिखाया।हमारी पहचान—
हमारी लोकगाथाओं में जीवित है,
हमारे मिथकों में सांस लेती है,
हमारी शौर्यगाथाओं में चमकती है।हमारे लोकगीतों की धुन में,
हमारी कविताओं की पंक्तियों में,
हमारी बोली-भाषाओं की मिठास में—
हमारी आत्मा बसती है।हमारी पहचान—
हमारी संस्कृति है,
हमारे अपने पर्व-त्योहार हैं,
हमारे नृत्यों की लय है,
हमारी परंपराओं की गरिमा है।हमारी पहचान—
संघर्ष और बलिदान की अमर गाथा है,
जहाँ बिरसा मुंडा का उलगुलान गूंजता है,
तंट्या भील की वीरता चमकती है,
बाबुराव शेडमाके का साहस दिखाई देता है,
रानी दुर्गावती का स्वाभिमान जीवित है।जहाँ तिलका मांझी का विद्रोह,
सिदो-कान्हू का संघर्ष,
और अनगिनत वीर-वीरांगनाओं का इतिहास
हमारी रगों में बहता है।हमारी पहचान—
किसी एक किताब में नहीं,
बल्कि पीढ़ियों की स्मृतियों में लिखी है।हमारी पहचान—
सिंधु घाटी सभ्यता की उन जड़ों से जुड़ी है,
जहाँ से हमारी सांस्कृतिक धारा प्रवाहित हुई,
जहाँ प्रकृति और मनुष्य का संतुलन
जीवन का आधार था।हमारी पहचान—
न किसी के दिए हुए नाम की मोहताज है,
न किसी परिभाषा की बंधक है।हमारी पहचान—
हमारी अपनी है,
हमारे संघर्षों की है,
हमारे अस्तित्व की है।और यही आवाज़
आज भी गूंज रही है—
हम आदिवासी हैं,
हम मूलनिवासी हैं,
हम ही इस धरती की
सच्ची पहचान हैं।

1 टिप्पणी:
आपने आदिवासी लोगोकी की पहेचान ईतने अच्छेसे बया की... उसके लिये हम आपके शुक्र गुजार हैं...
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