बाबासाहेब थे इसलिए
– डॉ. दिलीप गिऱ्हे
बाबासाहेब थे इसलिए—
हम पढ़ रहे हैं,
लिख रहे हैं,
सोच रहे हैं,
और खुलकर बोल रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम प्रतिरोध कर रहे हैं,
अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं,
अपनी अस्मिता को पहचान रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम मतदान कर रहे हैं,
अपने निर्णय खुद ले रहे हैं,
लोकतंत्र में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम विद्यार्थी बन रहे हैं,
शोधार्थी बन रहे हैं,
ज्ञान की नई राहें खोज रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम शिक्षक बन रहे हैं,
प्रोफेसर बन रहे हैं,
और शिक्षा की मशाल आगे बढ़ा रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम प्रशासन और व्यवस्था में
अपनी जगह बना रहे हैं—
पुलिस इंस्पेक्टर, तहसीलदार,
पुलिस अधीक्षक, जिलाधिकारी बन रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम नेतृत्व कर रहे हैं—
सरपंच, विधायक, सांसद बन रहे हैं,
और देश की दिशा तय कर रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम ऊँचाइयों को छू रहे हैं—
मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री,
और राष्ट्रपति तक बन रहे हैं।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम अपनी संस्कृति को बचा रहे हैं,
अपनी जड़ों को पहचान रहे हैं,
और अपने इतिहास को संजो रहे हैं।क्योंकि बाबासाहेब ने हमें
सिर्फ अधिकार नहीं दिए,
बल्कि जीने का आत्मसम्मान दिया,
सोचने की आज़ादी दी,
और संघर्ष की ताकत दी।उन्होंने हमें दिया—
विश्व का सर्वश्रेष्ठ
भारतीय संविधान,
जो समानता, न्याय और स्वतंत्रता का
जीवंत दस्तावेज़ है।बाबासाहेब थे इसलिए—
हम आज खड़े हैं,
अपनी पहचान के साथ,
अपने स्वाभिमान के साथ।हम उनका केवल स्मरण नहीं करते,
हम उनके विचारों को जीते हैं,
उनके सपनों को आगे बढ़ाते हैं।बाबासाहेब को हूल जोहार…

1 टिप्पणी:
Very Nice
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